जुग्गू काका की कविताएं
जुग्गू काका की कविताएं
1–।।चला गदेलव महुआ बीनै।।
पचपेड़वा की नरखोहिया में
बसवरिया के आगे।।
चुई चुई महुआ पैर परा बा
बड़े सबेरवा जागे ।।
अन्हियर्वा में जुग्गू काका
कब तक केका चीन्है ।।
चला गदेेलव महुआ बीनै ।।1।।
मौनी अउर सिकहुला लइके
सोवा जिन मुड़वारी
उठा चला अब कथरी फेका
जाय गिरै गोड़वारी
कुकू कुकू कै बोलै कोयल
बाटै अबही नीन्है ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।।2।।
गुग्गू काका के पेड़वा से
रोज चोरावै महुआ ।।
दाव लगाइके रोजै बईठे
मिलइ न एक मिठऊआ ।।
एक द्वि पावै टोय टाय के
अँगुरी पकड़ि के गीनै ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।। 3।।
आपन आपन गमछा लइल्या
अउर बोतलवम पानी ।।
उठा चला अब भोर होइगवा
करा न आना कानी ।।
लपसी बरिया बनई के बाटै
भले खाब द्वि तीनै ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।।4।।
2–।।चला गदेलव ढुक्कुल खेली।।
अउर तनी के साम होइदया
जा आवा गोलिया धइके ।।
ढूढ़ि न पाउब्या थकि जाब्या पर
मजा मिले धुंधलउके।।
जुग्गू काका के मढ़ई के
लुका छिपी में हम सब ठेली ।।
चला गदेलव ढुक्कुल खेली।।1।।
गड़हिस लइके बसवरिया से
आगे केहू न जाये ।।
खलिहाने में केहू लुकाये
ओकर मानि न जाये ।।
सुने रहे हम उपड़उरे मे
बाटै भुतहा तेली ।।
चला गदेलव ढुक्कुल खेली।।2।।
सौ तक गिनती गिनत रह्या तू
पीछे तनिक न आया।।
कूकी बोलब तबै आइके
सबके टीप लगाया ।।
धक्का मुक्किस बचा रह्या
केह्य न ढकेल ढकेली ।।
चला गदेलव ढुक्कुल खेली ।3।।
गिरी दलनिया में न जाया
करया न झगड़ा टन्टा ।।
अरे बन्नवस बचा रह्या सब
बाटै पक्का बेइमण्ठा ।।
तबौ हम शबे देखा ओनका
बनये अही सहेली ।।
चला गदेलव ढुक्कुल खेली4।।
3–।।चला गदेलव गोली खेलय ।।
सब ज़ने जाइके अपने घरेस
गोली लइके आवा ।।
ऊँच खाल कुछ देख ताकिके
पिल्लुर एक बनावा ।।
अपने घरे बताइके आया
जौने केहू न हेरय ।।
चला गदेलव गोली खेलय ।।1।।
जुग्गू काका के पता करा वै
भिटवप सोवत ह्वैइहे ।।
खटिया ओनकय फेकि देह्य जब
सीधे चला न अइहे ।।
काल्ह जीत के भाग रहेन तब
आज हारिके डोलय ।।
चला गदेलव गोली खेलय ।।2।।
बेइमानी जे करे आज तो
ओकर कभौ न होये ।।
एक पिले इक लागे जेकर
सब गोली लयिजाये ।।
बन्नेस कहि द्या दुसरेक पारिप
टिपिर टिपिर न बोलय ।।
चला गदेलव गोली खेलय ।।3।।
आज पटे न होये केहुके
मिले न एक उधार।
द्वि ठे लागे पिले अगर द्वि
पड़े देइके डाड़ ।।
चार चार के होये मिलउवल
जे झेलि सकै तो झेलय ।।
चला गदेलव गोली खेलय ।।4।।
हाथ धरउव्वल टप्पा उच्छा
तनिकौ मानि न जाये ।।
ढेंगुल लागे तबै केहुके
सब गोली मिलि पाये ।।
जुग्गुस कहि द्या बड़का अंटा
थैली में न ढूढ़य ।।
चला गदेलव गोली खेलय ।।5।।
4–।चला गदेलव चली बरातें।
मोलउ कपड़स काम चले न
चला निकारा नौका ।।
जुग्गू काकक पकड़ के लावा
मिले फिरू न मौका ।।
बिन न्योता के बन्ने आयेन
फूले नही समाते ।।
चला गदेलव चली बराते।।1।।
लेकिन केहू न ढेला मारे
न मारया पइसा गोली ।।
खीश निपोरया जिन मड़ये में
होये बहुत ठिठोली ।।
जिन्ने के समजाइ दिहा
जिन जईहे मकनाते ।।
चला गदेलव चली बराते।।2।।
डीजे बजे लुटउव्वल होये
पइसा अउर बतासा ।
चलिके दुअरेक चार लगावा
देखा तनिक तमासा ।।
डांस करइके पउबै करब्या
तोहका केहू न डाटे ।।
चला गदेलव चली बराते ।।3।।
लड्डू अउर मिठाई पउब्या
फुलकी मिले पनीर ।
छोला खाइके करा भगउव्वल
होइ जाये नस ढील ।।
बिन खटिया के सपना देखिब्या
दूर जाइ के नाते ।।
चला गदेलव चली बराते ।।4।।
दुल्हा दुल्हिन मौज मनइहे
नात नतेरुआ होइहें तर ।।
भये सबेरवव एनका देखब्या
बनिहे पलिहरवा के बानर ।।
गमछा बान्हे मुँह लुकवइहे
अइहे चला लजाते ।।
चला गदेलव चली बराते ।।5।।
5–।। चला गदेलव होय कबड्डी ।।
चला चप्पलेक् मेड़ बनावा
बिचवम खींचा खीन्हा ।
बाट बटउव्वल गुइयक कइल्या
आपन आपन चीन्हा ।।
जुग्गू काकक हमरेम कईं के
आज बन्नवक तोड़ द्या हड्ड़ी ।।
चला गदेलव होय कबड्डी ।।1।।
मुक्का मुक्की मारि न जाये
न होये बदमासी ।
तनिक जिन्नवक अँखिया देखा
बाटै रकत पियासी ।।
अबकी आये तो पकडिके एकर
खीचमखांच लगाया चड्डी ।।
चला गदेलव होय कबड्डी ।।2।।
हुर्र कहे पे मानि न जाये
केहू न जाये जर्ता ।
तँगरी बहुत बचाइ के खेल्या
लागेक मिले न खर्चा ।।
थाम्हे रह्या साँस जिन तोड़्या
नाही मरेप जिये मुसड्डी ।।
चला गदेलव होय कबड्डी ।।3।।
पकड़ि के टँगरी खींच लेह्य
जब ज्यादा केव मकनइहे ।
जुग्गू के समझाइ देह्य कि
मुड़वा पे चढ़ि जइहे ।।
अंखिया मूंदि के जिन दउड़या
खुद रह्या बचाये गढ्हा गड्डी ।।
चला गदेलव होय कबड्डी ।।4।।
उधुम मचाइके एह कोने से
व्हय कोने तक जाया ।
कनबोजवा पे थाप लगाइके
लउठि सलामत आया ।।
देह फुलाइके पनकिरवा एस
बन्ने लागत अहा फिसड्डी ।।
चला गदेलव होय कबड्डी ।।5।।
–।।चला गदेलव टैर चलाई।।
उसरहवा से सुरु करी जा
महुअरिया तक आवा ।
सन सन सन सन पगडण्डी पे
चला टैर मकनावा ।।
जुग्गू काका के गोड़वा में
द्वि दिन होइगा फ़टे बेवाई ।।
चला गदेलव टैर चलाई ।।1।।
अगर बन्नवा मिलै आज तो
केहा न आना कानी ।
सिविल टाप में केहे रहा इ
हमहू से बेईमानी ।।
एकरे मुड़वा पे टैर फेकिके
खीचमखांच चला लगाई ।
चला गदेलव टैर चलाई ।।2।।
जान तहा की जुग्गू काका
बुढ़वा टैर निकलिहे ।
भागमभागी ठेल ठाल में
फिनू कतौ गिर जईहे ।।
केहू उठाये न ओनका फिर
नाहित ओकर करब पिटाई ।
चला गदेलव टैर चलाई ।।3।।
चला भदैयां आज हम सबे
घूम घाम के आवा जाय ।
अगर वसिरवा कतव गा होये
तो ओकर टैर चोरवा जाय ।।
नाम लगाइके लबलीना के
तुरन्त हुआ से भागिन आई ।।
चला गदेलव टैर चलाई ।।4।।
7– चला गदेलव नेता आयेन।
जुग्गुक कहिड्या दौड़िके आवै
बन्नेक लेयि बोलाय
मूस मोटाइके लोढ़ै होये
अब जादा जिंनि खाय
जीन्नेक मढ़हिम आज सबरवै
गवना वाले पईसा पायेन ।
चला गदेलव नेता आयेन।
सुने रहे हम पांच बार वे
ठाढ़ भएन परधानी
घरहुक उर्द मिलाएँन जेंगर
याद आइगा नानी
चंगु मन्गुक बतिया सुनिके
पईसक नदी बहायेंन ।
चला गदेलव नेता आयेन।।
अबकी बेरिया बाटत बाटेन
मेहरारुन के साड़ी
दारू रूपया भरि भरि आवै
रतीयभ दौउड़य गाड़ी
ख़ुसूर फुसुर फिरि मान मनउव्वल
बुढ़वन के बगदायेन ।
चला गदेलव नेता आयेन।।
देखत पैर छुवत फिर ठहिके
जनमत के अजमावे
अबकी जितिहे गंगू भइया
नारा रोज लगावे
काव केहेन घड़ियाली आंसू
ये कईसन उपजायेन ।
चला गदेलव नेता आयेन।।
कहिड्या चला चलै जुग्गू के
पयिहे कुछ दस बीस
नाहित हांरेप नज़र न अइहें
मुँह बिचकईहे खीस
सुने रहे हम मंगू भइया
लाखन रूपया क़र्ज़ लुटाएंन ।
चला गदेलव नेता आयेन।।
काठिन्य निवारण
मंगू-- आधुनिक नेता
ठहिके-सोच समझकर
मरहररून -स्त्रियां
ख़ुसूर फुसुर -कानाफूसी
चंगु मंगु -चापलूस
जेंगर -उड़द का पौधा
जुग्गू -गाँव का लड़का
बन्ने -गाँव का मजाकिया लड़का
जिन्ने -गाँव का लड़का
8– चला गदेलव खेली तास ।
जुग्गु काका के मड़ही मे
जिन्ने के आज फ़सावा
बन्ने के देखा आय होय तो
एक गड्डी मंगवावा
चार जने न
पूरा होइहे
तिकड़ी के होये अभ्यास ।
चला गदेलव खेली तास ।।1।।
हुकुम के दुग्गी तुरन्त निकाला
करा गुलमवक पीस
अरे बन्नवा एक्का पाइस
गजब निकारिस खीस
शांत रहा
गुग्गू जिन बोला
आपन रोके रहा भड़ास ।
चला गदेलव खेली तास ।।2।।
तिकड़ी छोड़ के लकड़ी खेला
पीसा खुब मनमानी
आपन हाथ बनावा एम्मन
होये न बेईमानी
हर चाली मे
बड़ा लगावा
लकड़ी के होये प्रयास ।।
चला गदेलव खेली तास ।।3।।
अरे बन्नवा पाइ गबाटै
अबकी चारौ एक्का
बादशाह के साथे बाटै
जुग्गुक छूटि गा छक्का
लकड़ी देखि के
जिन्नेक लागै
अबकी बारम्बार पियास ।
चला गदेलव खेली तास ।।4।।
जुग्गुक माई लइके मुंगरी
दौड़ी अहा संम्पाती
रुका रहा तू आज बताउब
दहिजरऊ के नाती
दिनभर तसवा
खेल खेल के
लाला बनब्या होये नास ।।
चला गदेलव खेली तास ।।5।।
9– एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।
रात रात तक
नींद न आवै
हड्डी मे घुसि गवा बुखार ।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
बड़े सबेरवै जुग्गु बोलेन बाबू अब जिनि सोवा
पेटवा मे कुछ फूलत बाटै एका आईके टोवा
निहुरे निहुरे
उनके बाबू
बड़े ध्यान से रहे निहार ।।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
तनिका बाबू टोइके देखा रतिया भर ई डोला थे
बारह बजिके एक मिनट पर टर टर टर टर बोला थे
इतना कहिके
रोवै जुग्गु
गिरै लाग अंसुवन की धार ।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
एकरे पेटवम फोड़ा होइगा केहू कहइ जब लागेन
आनन फानन मे लाद फ़ानि के सुलतापुर सब भागेन
डॉक्टर बोलेन
सोच समझि के
अपरेशन के करा तयार ।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
द्वि जने पैर पकड़ि के दाबेन एक जने पकडेन घेघा
थर थर थर थर जुग्गू कापै बड़ा के निकरा मेघा
मेघा देखत
जुग्गू भइया
जिभिया आपन देहेन निकार ।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
काव बताई अबकी होलिम जुग्गू रंग लगाएन
एक द्वि गोझिया वैसे खायेंन समझि बहुत कम पाऐन
मेघा समझि के
गोझिया खायेन
बीति गवा त्योहार ।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।
अगर बन्नवा कतौ होय तो ओका तुरत बुलावा
बाल घुंटी के साथ साथे डाबर लाल तेल मलवावा
छोड़ि देय
जुग्गू से कहिं द्या
बीड़ी पान पुकार ।।
एक दिन जुग्गु भयेन बिमार ।।
समस्त रचनाएं Rakmish Sultanpuri द्वारा रचित हैं
May–2015

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